दीर्घायु के लिए क्या करें, क्या न करें

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जिदंगी एक वरदान है। उसे अपने और अपने आश्रितों के लिए अभिशाप न बनायें। भगवान ने यह जीवन भरपूर जीने के लिए दिया है न कि गंवाने के लिए। इस जीवन को संभाल कर रखना हर इंसान के हाथ में है। आप भी इन सुनहरे सिद्धांतों को अपना कर अपनी आयु को और बढ़ाएं।

हंसिए और आशावादी बनिए:-

जिंदगी के अधिकतर पलों को हंसते हुए जिएं। छोटी छोटी बातों को नजऱअंदाज करें। हंसने से तनाव और चिंता कम होती है। गुस्से और विद्वेष की भावनाएं कम होती हैं। जीवन के प्रति नकारात्मक भावनाएं भी कम होती हैं। जो लोग अपने जीवन का भरपूर आनन्द उठाना चाहते हैं, उन्हें आशावादी रवैय्या अपनाना चाहिए। आशावादी नजरिया रखने वाले लोग बीमारियों को स्वयं से दूर रखते हैं। आप भी खुश और आशावादी बनिए और स्वस्थ रहिए।

मेडिकल जांच करवाते रहें:-

यदि कुछ भी शारीरिक या मानसिक समस्या महसूस हो तो डॉक्टर से सम्पर्क करना न भूलें। कई बार बीमारी की समय पर सही पहचान हो जाने पर आप बड़ी बीमारी के खतरे से बच जाते हैं क्योंकि शुरूआत होते ही आपने दवा समय पर ले ली। देर होने पर समस्या कठिन होती जाती है और इलाज मुश्किल लगता है। इसलिए नियमित डॉक्टरी जांच करवाते रहना चाहिए।

सक्रिय रहिए:-

स्वयं को सक्रिय बनाए रखें ताकि जीवन बोझ न लगकर आनन्द देने वाला लगे। कभी-कभी स्वयं को किसी काम की चुनौती देते रहें ताकि आपका दिमाग और शरीर चुस्त बना रहे। यदि चुनौती पूरी न कर सकें तो निराश न हों।

उसी प्रोजेक्ट पर पुन: विचार कर फिर से उस चुनौती को स्वीकारें और जुट जायें। समय हो तो अपनी पसंद के सेमिनारों में भाग लें और अपना बौद्धिक स्तर बढ़ायें । खाली समय का पूरा सदुपयोग करें। खाली बैठकर दिमाग को शैतान का घर न बनायें।

खाली समय में अपने शौक पूरे करें, अच्छा साहित्य पढ़ें, बागवानी करें, हल्का संगीत सुनें। यदि आप रिटायर्ड हैं तो किसी समाज सेवी संस्था से जुड़ जायें ताकि आपमें नकारात्मक सोच न पनपने पाये। समाज सेवा करते समय दिमाग में यह रखें कि आपको यह काम निस्वार्थ भाव से करना है। कभी भी समाज सेवा में स्वार्थ न ढूंढें।

जितना समय आप स्वयं को कामों में लगाए रखेंगे, आप कई तनावों से दूर रहेंगे और मानसिक रूप से पीडि़त भी नहीं होंगे।

संतुलित भोजन को बनायें साथी:-

अपने भोजन पर पूरा ध्यान दें। संतुलित भोजन खाना और समय पर भोजन खाना न भूलें। भोजन में सेचुरेटिड वसा का समावेश कम रखें।

सेचुरेटेड वसा दिल की बीमारी को बढ़ाने में मदद करती है। अधिक बासे भोजन का सेवन न करे। तले भुने भोज्य पदार्थों का सेवन कम करें। केक-मक्खन, चीज, आइसक्रीम आदि का नाम अपनी सूची से काट दें या कम करें।

खाने में रिफाइन्ड ऑयल का प्रयोग करें। भोजन में रेशेदार भोज्य पदार्थों का अधिक समावेश करें। फल-सब्जियां, दालें, अनाज, मेवे, अंकुरित भोजन, दलिये पर अधिक जोर दें।

ये न करें:-

कुछ बातों पर ध्यान दें जो जिंदगी को सुखद बनाने के बजाए दु:खद बनाती हैं।

अधिक टीवी न देखें:-

अधिक टीवी देखने से आपकी कल्पनाशक्ति कम होती है। आप आलसी बनते हैं, अधिक खाते हैं जिसके कारण मोटापा अनजाने में आपको घेर लेता है। अधिक टी वी देखने वाले अवसादग्रस्त हो जाते हैं। टीवी के स्थान पर वही समय घर परिवार में लगायें, आउटडोर खेल खेलें, अपने मित्रों के साथ समय बिताएं या अपने शौकों को पूरा करें

असंतुलित भोजन:-

जो लोग अपने भोजन पर अधिक ध्यान नहीं देते, उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और अक्सर बीमार रहने लगते हैं। इस आदत को जल्दी ही बदल डालें। भोजन हमारी रक्षा के लिए है न कि नुक्सान पहुंचाने के लिए। समय पर भोजन खायें।

नींद का पूरा न होना:-

जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती, वे तनावग्रस्त रहते हैं। तनाव कई रोगों की जननी है। नींद भरपूर लें। स्वयं को तनावमुक्त बनायें और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ायें।

नींद पूरी लेने के लिए अधिक कैफीन और अल्कोहल का सेवन न करें। दांतों पर ध्यान न देना:- अगर आपके दांत ठीक हैं तो आपका स्वास्थ्य बेहतर रहता है क्योंकि जो कुछ हम खाते हैं, वह दांतों से चबाकर अन्दर ले जाते हैं, इसलिए अपने दांतों की सुरक्षा अवश्य करें। खराब दांत भोजन को विषाक्त बनाते हैं क्योंकि दांतों में फंसे रहने वाले जीवाणु भोजन के साथ अंदर चले जाते हैं जिससे कई संक्रामक रोग हो सकते हैं।

मालिश न करना:-

मालिश मांसपेशियों के तनाव को दूर करती है और जिससे शरीर रिलैक्स होता है। शारीरिक और मानसिक थकान को दूर करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है। मालिश करना या करवाना। जो लोग नियमित मालिश करते या करवाते हैं उनकी त्वचा भी निखरी रहती है और झुर्रियां दूर रहती हैं।

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