रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज के बाद बढ़ जाती है हार्ट अटैक की सम्भावना

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रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज के बाद से महिलाओं में हार्ट अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही में ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है, हड्डियां कमजोर होने से फ्रैक्चर होने की संभावना भी बढ़ जाती है। खान पान में कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बढ़ाकर मेनोपॉज के बाद होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है।  महिलाओं में होने वाले अंडजनन की प्रक्रिया के खत्म होने पर रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) हो जाता है। मेनोपॉज की शुरुआत 4० से 55 वर्ष की आयु में होती है। कभी-कभी मेनोपॉज 4० वर्ष से पहले भी हो जाता है, इसे प्रीमैनोपॉज कहते हैं। मेनोपॉज के बाद फीमेल हार्मोन एस्ट्रोजन को कार्डिएक प्रोटेक्टिव माना जाता है। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन और प्रोजस्ट्रॉन के स्त्रावण में कमी होने लगती है जिसकी वजह से हृदय संबंधित बीमारियों के घेरने की आशंका बढ़ने लगती है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में कम उम्र में हार्ट अटैक की संख्या ज्यादा होती है।

क्वीनमेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पलता शंखवार ने बताया कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं को कई बीमारियां घेर लेती हैं। मेनोपॉज के बाद शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम हो जाती है जिससे ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है। हड्डी कमजोर होने से फै्रक्चर होने की संभावना बढ़ जाती है, योनि का सूखापन, साथ ही घबराहट, चिड़चिड़पन, मूड का बार-बार बदलना, कई मामलों में ब्रेस्ट पेन होना आदि शामिल है।

ऐसे में रहें सावधान

मेनोपॉज की आयु सामान्यत: 4० से 55 वर्ष के बीच में मानी जाती है। लेकिन अगर 55 वर्ष की आयु के बाद भी मेनोपॉज न हो तो तुरन्त स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सामान्यत: मेनोपॉज में मासिक धर्म देर से आने लगता है, स्त्राव की मात्रा घटती चली जाती है। अगर मेनोपॉज के दौरान रक्तस्त्राव बहुत ज्यादा हो तो तब भी चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। साथ ही सोनोग्राफी के साथ एंडोमेटेरियल बॉयोप्सी भी करा लेनी चाहिए।

खान-पान में रखें विशेष ध्यान

35 वर्ष की आयु के बाद प्रतिदिन एक ग्राम कैल्शियम लेना चाहिए यह चाहे दवा के रूप में हो या आहार के रूप में। इसके साथ ही एंटी ऑक्सीडेंट लेना चाहिए। साथ ही मेनोपॉज के बाद आइसोफ्लेवॉन लेना चाहिए या खाने में सोयाबीन की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए, यह भी आईसोफ्लेवॉन की कमी दूर करती है। डॉ. रेखा सचान ने बताया कि अगर मेनोपॉज के बाद ज्यादा परेशानी होतो ऐसी स्थिति में मरीजों को हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जाती है। इस थेरेपी से मेनोपॉज के बाद होने वाली परेशानियों को कुछ समय तक टाला जा सकता है।

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