खुश रहने और सकारात्मक विचारों से मजबूत होते हैं रिश्ते

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कहते हैं पति-पत्नी का रिश्ता उम्र भर का साथ निभाने वाला रिश्ता है। इस रिश्ते से ही समाज का सृजन होता है। ऐसे में पति-पत्नी का रिश्ता दिल से मजबूत होना चाहिए। इसकी सबसे बड़ी खासियत तो यह है कि इनके बीच आपसी प्रेम और विश्वास अगर है तो कोई इस रिश्ते की नींव को नहीं हिला सकता है। एक दौर था जब पत्नी को पति से कमतर आंका जाता था, लेकिन आज वक्त बदला और दोनो के रिश्ते की परिभाषा बदल गई। एक दूसरे के प्रति समानता का भाव व्याप्त हो चुका है। एक दूसरे का ख्याल और कदर होना आज बहुत जरूरी हो गया है।

पति-पत्नी का जिसमें हर लम्हा एक ताजगी भरा चाहिए होता है, नहीं तो कुछ सालों के बाद एक-दूसरे का साथ बोझिल भले ही न लगे पर बोरियत भरा जरूर लगने लगता है, उनके बीच से खुशी गायब हो कर औपचारिकता में बदल जाती है। जबकि कुछ ऐसे पति-पत्नी भी होते हैं, जो उम्र बीत जाने पर भी एक-दूसरे के साथ हमेशा हंसते-खिलखिलाते नजर आते हैं।

इस रिश्ते को लेकर हुए कई शोधों में भी यह बात सामने आ चुकी है कि खुशनुमा लम्हे ही रोमांटिक रिलेशनशिप में नजदीकियों को बरकरार रखते हैं। अक्सर पत्नियों को पतियों से यही शिकायत रहती है कि वे महत्वपूर्ण तारीखें, जन्मदिन, शादी की सालगिरह ही नहीं बल्कि और भी कई बातें भूल जाते हैं। इस भूलने की आदत पर कपल्स में नोक-झोंक होना आम बात है। ऐसे में जरूरत है लाफ्टर मेडिसिन की जिसका जादुई असर देखने को मिलता है।

छोटी-छोटी खुशियों में रहें खुश

कोई कॉमेडी सीरियल या मूवी देखते हुए हंसना एक अलग बात है, इसमें बनावटीपन झलकता है, जबकि पति-पत्नी को एक-दूसरे की बातों को एंज्वॉय करना आना चाहिए, कभी किसी चुटकले पर तो कभी किसी की नकल उतारने के अंदाज पर, कभी पत्नी के चाय में चीनी डालना भूल जाने पर तो कभी पति द्बारा सिर पर लगा चश्मा घर भर में ढूंढने की आदत पर। ऐसी कई बातें हैं जो आपको ओरिजिनल हंसी के लम्हों की यादें तो देंगी ही, साथ ही एक अलग प्रकार का अटैचमैंट भी डेवलप होगा।

इसमें एक बात का ध्यान रखें कि कभी भी अपने जीवनसाथी के मोटापे पर, उसके सॉक्स न बदलने की आदत पर या फिर ज्यादा खाना खाने की आदत जैसी बातों पर न हंसें क्योंकि इस प्रकार की हंसी दूसरे का मजाक उड़ाने का कारण बनते हुए मन-मुटाव की परिस्थितियों को जन्म देती है।

हंसने का कोई मौका न जाने दें

यह कहना गलत होगा कि हंसने की कोई वजह नहीं होती क्योंकि बिना बात या परिस्थिति के कॉमेडी शो के जज तो हंस सकते हैं परंतु आम इंसान के लिए बिना बात के हंसते रहना सहज नहीं है। हैक्टिक श्ोड्यूल में हंसने और हंसाने की वजह तलाशनी बेहद जरूरी है। कभी अपनी गलतियों पर तो कभी रास्ते या ऑफिस में पेश आई फनी सिचुएशन पर हंसते हुए एक हैल्दी वातावरण बनाने का प्रयास करें।

कोई गेम खेलें या फिर उन बातों और पलों को तलाशें जिन पर आपके लाइफ पार्टनर को हंसी आती हो। कार्टून प्रोग्राम या फिल्में आपको हंसाती और गुदगुदाती तो हैं ही, साथ ही कई साल पीछे भी ले जाती हैं और सारी टैंशन आप भूल जाते हैं। घर में भी मस्ती करने तथा एक-दूसरे को हंसाने के मौके तलाशते रहें।

अच्छी सोच और भावनात्मक होना है जरूरी

हंसी से दो लोगों के बीच एक पॉजिटिव इमोशनल क्लाइमेट बनता या रिस्टोर होता है। यही नहीं, इससे एक सेंस ऑफ कनेक्शन भी डेवलेप होती है। जब कोई यह कहता है कि उसे अपने साथी की कंपनी बेहद पसंद है तो इसकी वजह यह है कि वह शख्स उसे हंसने-मुस्कुराने के मौका देता है। फिर यही हंसी रिश्ते में नजदीकियां लाती है। शोध के मुताबिक पुरुष उस महिला को ज्यादा पसंद करते हैं जो उनकी मौजूदगी में दिल खोलकर हंसती हैं और पत्नी की हंसी तो यूं भी लाइफ में किसी टॉनिक से कम नहीं होती क्योंकि उसकी हंसी उनके खुशहाल दाम्पत्य की निशानी मानी जाती है।

हंसमुख दम्पति हमेशा रहते है साथ

साथ हंसने वाले कपल्स हमेशा एक-दूसरे के साथ रहते हैं। एक रिसर्च के अनुसार वैसे तो सेंस ऑफ ह्यूमर वाले पुरुष हर तरह की सोसायटी में महिलाओं को अट्रैक्ट करते हैं, यही ह्यूमर पति-पत्नी के बीच अपनी फ्रैशनैस से रिलेशनशिप को हमेशा हैल्दी बनाए रखता है। प्रॉब्लम्स आने पर भी यह सेंस ऑफ टगेदरनेस स्ट्रांग रहती है क्योंकि पॉजीटिव मेमोरीज नेगेटिविटी पर हावी हो जाती हैं। दरअसल लाफ्टर स्ट्रेस बस्टर की तरह ट्रीट करता है। यह स्ट्रेस को टेम्परेरी ही सही पर कम कर देता है। साइंटिफिकली, स्ट्रेस हार्मोन्स पर लाफ्टर का निगेटिव इंपैक्ट पड़ता है। यह एन्डोर्फिन्स या फील-गुड हार्मोंस को एनकरेज करता है।

एक मीठी सी झप्पी ला देती है करीब

प्यार भरी झप्पी कहें या जादू की झप्पी या फिर आलिगन का नाम दें, जब हम अपने पार्टनर को झप्पी देते हैं तो दो दिल बिना बोले ही बहुत कुछ कह जाते हैं। अपने प्रिय को बांहों में भरना या समेटना यह व्यक्त करता है कि तुम हर हाल में मुझे स्वीकार हो। यह प्रेम की अभिव्यक्ति है जिसमें हम अपने साथी के वजूद को अपने भीतर समेट लेना चाहते हैं। प्यार भरे रिश्ते की शुरुआत ही निकट आने के बाद स्पर्श और फिर आलिगन से होती है।

यह जादू की झप्पी एक-दूसरे के भीतर खुशी का संचार करते हुए उन्हे नई ऊ र्जा से भर देती है। जो पति अपनी पत्नी को बांहों में नहीं लेते वे अपनी पत्नी की निगाहों में गुरूर से भरे माने जाते हैं। यही नहीं, पत्नी को आपसी संबंध तक बोझिल लगते हुए हर खुशी से दूर ले जाने लगते हैं क्योंकि उसे अपनेपन की भावना का अभाव अपने रिश्ते में खलने लगता है।

बढ़ती उम्र को करें नजरअंदाज

कहते हैं कि बढ़ती उम्र में पति-पत्नी का रोमांस करना थोड़ा कठिन हो जाता है। कभी बच्चों की वजह से तो कभी पारिवारिक जिम्मेदारियों या नौकरी की वजह से। कई बार तो ऐसा होता है कि अगर पति कहते हैं भी है तो पत्नियां व्यवस्ता या बच्चे क्या सोंचेंगे कहकर मना कर देती है, लेकिन ऐसा करना बिल्कुल गलत है। आखिर उम्र के बढ़ते तकाजे से तो रिश्ता और मजबूत हो जाता है। जिसमें हर चीज की जरूरते और बढ़ जाती है ऐसे में कई बार रोमांस से परहेज करना रिश्ते में दूरियां बढ़ा देता है।

पति भी छोटी-छोटी बातों पर तनाव करने लगते हैं। अगर आप इन सारी बातों को अपने रिश्ते में हावी नही होने देना चाहते हैं तो बढ़ती उम्र के साथ रोमांस के लिए समय जरूर निकालें। एक-दूसरे से बात करें और आपसी समस्याओं पर डिस्कशन करें। रेस्टोरेंट व मॉल जाने के साथ-साथ पति-पत्नी को मूवी देखने भी जाना चाहिए। जिससे उम्र का असर दूर होगा और आप अपने जवानी के दिनों की तरह आनंद से जिंदगी जी सकेंगे।

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