प्लास्टिक के कप में चाय पीने के नुकसान

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प्लास्टिक के कप में चाय पीने के नुकसान

प्लास्टिक के कप में चाय पीने के नुकसान- शरीर को तरोताजा करने के लिए हम लोग चाय पीते हैं। अगर आप को पता चले कि तरोताजा करने वाली चाय का गिलास सेहत के लिए हानिकारक है तो शायद आप इन गिलासों का उपयोग न करें। और अगर आप मालूम होते हुए भी इन गिलास को इस्तेमाल कर रहें हैं तो अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहें हैं। इन गिलासों के इस्तेमाल से आंतों का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा भी कई बीमारियां घर कर जाती हैं।

बाजार में बिकने वाली चाय की दुकानों में सबसे ज्यादा भीड़ लगी रहती है। घरों से ज्यादा इन दुकानों पर चाय बनती और बिकती है। शहर की अधिकतर दुकानों पर प्लास्टिक के गिलासों में चाय दी जाती है। इस प्लास्टिक के गिलास में जब गर्म चाय उड़ेली जाती है तो इससे गिलास का पॉलीइथाएलीन नामक केमिकल पिघलकर चाय में मिल जाता है। जिससें आंत व पेट के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा हाइड्रो कार्बन भी सेहत बिगाड़ने का काम करता है।

पॉलीइथाएलीन केमिकल चाय के निकोटीन में रिएक्शन कर चाय को हानिकारक बना देता है। जिससें बॉडी में ब्लड सेल में कमी, पेट खराब होना, खाना डाइजेस्ट न होना, लूज मोशन आदि जैसी समस्या बढ़ जाती है। जिससे हमारा शरीर उबर नहीं पाता और किसी भी भयंकर बीमारी को जन्म दे देता है।

प्लास्टिक के गिलास के खतरों से अनजान –

यह जागरूकता की कमी ही है कि लोग प्लास्टिक के गिलास के खतरों से अनजान हैं। आमजनों को अपनी ही सेहत का ख्याल नहीं है। इसे जागरूकता की कमी ही कहेंगे कि इतनी खतरनाक बीमारी को लोग हंसते हुए गले लगा रहें हैं। उनको तो पता ही नहीं है कि वह फुर्ती लाने और सर्द से राहत के लिए जिन प्लास्टिक के गिलास में चाय पी रहे हैं वो ही उनके शरीर में बीमारियों को दावत दे रही हैं। शहर में कुछ दुकानकार ऐसे भी हैं जो प्लास्टिक के खतरों के बारे में जानते हुए भीे इन गिलासों का इस्तेमाल नहीं करतें।

शीशे के गिलास या मिट्टी के कुल्हड़ का करें इस्तेमाल –

प्लास्टिक के दोयम दर्जे के इन गिलासों के बजाए शीशे क गिलास या मिटटी के कुल्हड़ का इस्तेमाल करना चाहिए। इससें लोगों को इन खतरनाक गिलासों से छुटकारा मिल जाएगा। और चाय का मजा भी खराब नही होगा। इसके लिए चाय के स्टॉल और चाय पीने वालों को भी जागरूक होना होगा। चाय के इन गिलासों से हम बच सकें ओर इनसे होने वाली खतरनाक बीमारियों से भी दूर रहें।

पर्यावरण के लिए खतरनाक

प्लास्टिक को लेकर आज अजीब सा विवाद खड़ा हो गया है। पर्यावरणविद इसको लेकर अपने-अपने तर्क रखते हैं। कुछ का कहना है कि प्लास्टिक खतरनाक है, पर पिछले कुछ वर्षों में इसका उपयोग कई गुना बढ़ चुका है, जबकि इसके पक्षधरों का दावा है कि यह ‘इको फ्रेंडली’ यानी पर्यावरण के अनुकूल है, क्योंकि लकड़ी और कागज का उत्तम विकल्प है।
विश्ोषज्ञ बताते हैं कि प्लास्टिक कप का डिस्पोजल एक अन्य समस्या है, क्योंकि उनकी ‘रीसाइक्लिंग’ आसानी से संभव नहीं है। इनको जलाया जाए तो जहरीली गैस निकलती है। फिर भी भारत में रद्दी प्लास्टिक या तो जला देते हैं या जमीन में गाड़ देते हैं।

जमीन के अंदर गाड़ देना प्लास्टिक नष्ट करने का आदर्श और उचित ढंग नहीं है, क्योंकि एक तो जमीन भी कम है दूसरे यह प्राकृतिक ढंग से अपघटित नहीं होता है। इसको अपघटित होने में 5०० वर्ष लग जाते हैं। साथ ही यह मिट्टी को प्रदूषित करती है और सतही जल को बेकार कर देती है। आंकड़ों के अनुसार 195० से अब तक एक अरब टन से अधिक प्लास्टिक बगैर उचित निपटान के यूं ही फेंका जा चुका है। यह सैकड़ों-हजारों सालों तक बना रहेगा। इसके छोटे-छोटे टुकड़ों को खाने की वस्तु समझकर खाने वाली मछलियां और पक्षी हर दिन मर रहे हैं।

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