चीन की राखियों का कारोबार ठप, एक झटके में अरबों का नुकसान

चीन बोला - मोदी ने लड़ाई शुरू कर दी है

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रक्षाबंधन को लेकर बाजार सज गए हैं। इस बार चायना की बजाय भारतीय राखियों की डिमांड बढ़ गई है। रेशम की डोरियों से लेकर डायमंड राखियों की मांग बढ़ गई है। सीमा पर चीन से जारी तनाव का असर चीनी राखियों पर है। लोगों की भावनाओं को देखते हुए दुकानदारों ने भी चीन में निर्मित राखियों की खरीदी में रुचि नहीं दिखाई है।

फलस्वरूप बाजार से चीनी राखियां नदारद है। टैगोर मार्ग, नयाबाजार सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में 75 से ज्यादा राखियों के दुकानें लग गई है। व्यापारी प्रदीप चौहान व रतन मालवीय ने बताया चीनी की राखियों सस्ती आती है। लेकिन इस बार स्थानीय निर्माताओं ने भी लेटेस्ट डिजाइन में राखियां तैयार की है। जो चीनी की राखियों के भाव के बराबर में है। इस बार निर्माताओं ने बेहतरीन ब्रेसलेट बनाए है।

ब्रेसलेट की मांग बढ़ी 

मैटल से बने ब्रेसलेट की इस बार मांग ज्यादा है। इनकी कीमत 30 से 100 रुपए तक है। करीब 30 से ज्यादा डिजाइन के ब्रेसलेट बाजार में उपलब्ध है। रेशम की राखियां भी कई वैरायटी में है। महिलाओं के लिए रंग बिरंगे धागों में मोतियों से सजी राखियों की भी अनेक वैरायटी उपलब्ध है। व्यापारी कमलेश जैन ने बताया कि 5 से लेकर 250 रुपए तक राखियां हैं। डिमांड 20 से 50 रुपए की राखियों की रहती है।

स्थानीय स्तर पर मिला रोजगार 

बड़े कारोबारी जीएसटी के कारण बाहर से माल मंगवाने की बजाय स्थानीय स्तर पर ही राखी तैयार करवा रहे हैं। ताकि जीएसटी से बच सके। ऐसे व्यापारियों कच्चा माल महिलाओं को घर-घर उपलब्ध करवाकर राखियां तैयार करवा रहे हैं। इसके महिलाओं को घर पर ही रोजगार मिल गया है। रक्षा बंधन के लिए बाजार में सजी दुकानों पर राखी खरीदती महिला।

20 लाख का कारोबार प्रभावित 

चीनी आइटम की डिमांड नहीं होने से शहर में इसका 20 लाख का कारोबार प्रभावित हुआ है। रक्षा बंधन पर बच्चों के खिलौने, झूले, गिफ्ट आइटम की भी डिमांड रहती है। इसमें भी चीनी आइटम का खासा दखल रहता है। विक्रेता दिनेश पोरवाल ने बताया बदले हालात में चीनी आइटम की लोग खरीदी नहीं कर रहे है।

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