बला (Sida Cordifolia) : दूर करती कई बलाएं

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औषधीय पौधा ‘बला’ (Sida Cordifolia) है तो जंगली पौधा पर इसकी जितनी प्राण-प्रतिष्ठा की जाय कम है। यह जंगल में बहुतायत से मिलता है। प्रभूत मात्रा में उत्पन्न होने के कारण भारतीय आयुर्वेद चिकित्सक इसका उपयोग करते है। सभी प्रकार की कमजोरी विशेषकर प्रसव के बाद होने वाली कमजोरी मे बला की जड़ की छाल का 5-10 ग्राम चूर्ण दूध के साथ लेने पर विशेष लाभ होता है।

बीमारी व वात के कारण दुर्बलता में शरीर को सबल हेतु बला पंचाग का प्रयोग लगातार करने से सभी धातुएं पुष्टï होकर शरीर को सबल करती है। इसके अलावा यह विसर्प, अतसार, पेचिश, रक्तस्राव, पेशाब में जलन होने पर, क्षय रोग रक्त पित्त आदि में जैसे वैद्य बताए उस तरीके से सेवन करने से इन सब समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है।

तुलसी –

तुलसी के बारे में बहुत ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है। हमारे देश में तुलसी का आध्यात्मिक और आयुर्वेदिक दोनों महत्व है। तुलसी का सेवन करने से सर्दी-जुकाम, बदन दर्द, उल्टी, हिचकी, ठंड लगन ेपर, तनाव व दबाव, मलेरिया, कानदर्द, दांतों में दर्द में की जाती है। तुलसी का रस शहद के साथ जहां कान के दर्द में लाभकारी होता है वहीं 5-7 पत्तों के साथ लौंग को पीसकर गोली बनाकर दांतों के नीचे दबाने से दांत के दर्द में आराम देता है।

गर्मी में उपयोगी फल

गर्मी के मौसम मे सूर्य के प्रभाव से वातावरण काफी गरम हो जाता है, जिसका प्रभाव शरीर पर पड़ता है। पसीने के साथ शरीर के उपयोगी रासायनिक तत्व भी कुछ मात्रा में बाहर निकलतें है, जैसे सोडियम, पोटेशियम व अन्य लवण। इस कारण शरीर में कमजोरी थकान मांपेशियों मे खिचाव व ऐंठन जैसे लक्षण होने लगते है। लेकि गर्मी में कुछ रसीले फल जैसे तरबूज, ककड़ी, खीरा आदि का नियमित से सेवन करते रहने से गर्मी का हानिक ारक प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता है। पसीने आदि के कारण निकले शरीर उपयोगी लवणों की पूर्ति भी हो जाती है।

गर्मी में लाभकारी है ‘पुदीना’ –

गर्मी के मौसम में अधिकांश लोग पेट दर्द की समस्या से जूझते है, जिसमें खानें का ठीक से न पचना, खानें की इच्छा न होना, गैस बनना, पेट में दर्द होना आदि लक्षण प्रमुख है। इस सभी समस्याओं में पुदीना बहुत लाभकारी होता है। इसके अलावा पुदीने को पीसकर शहद मिलाकर चाटने से पेट के कीड़े भी मर जाते है। सबसें खास बात यह है कि यह पौधा कहीं भी आसानी से उगाया जा सकता है। बगीचों के साथ साथ इसे घर में गमले मे भी उगाया जा सकता है। गर्मी में पुदीने का उपयोग शरबत चटनी, पना आदि में किया जाता है।

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